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कालका जी, दिल्ली प्रदेश, India
प्रखर राष्ट्रवाद,देशभक्ति एवं प्रेम की भावना को काव्य गीतों से पल्लवित करने का एक आदर्श और अभिनव प्रयास.....

Wednesday, 28 December 2011

गीता जीवन धरा है

गीता विरोध के प्रत्युत्तर में ***********
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आज हमारी गीता पर जो प्रतिबन्ध की तुने सोचा है 
शायद तुमने अपने विनाश को कुरुक्षेत्र में खींचा है 

गीता वो है जिसको गाते हर वीर यहाँ बलिदान हुआ है 
गीता वो है जिसको गाते हर जीवन का वैराग्य हुआ है 

गीता वो है जिसको रट म्यानों में तलवारें हुंकार उठी थी 
आरि की सेना पर गीता जब बन काली सी नाच उठी थी 

आज हमारी गीता पर जो प्रतिबन्ध की तुने सोचा है 
शायद तुमने अपने विनाश को कुरुक्षेत्र में खींचा है

तुम भूल गए वो पाञ्चजन्य हुंकार हमारे वैभव का 
तुम भूल गए वो तेज हमारे तलवारों के गौरव का 

गीता का सन्देश यही है गौरव से निर्भय हो जीयो तुम 
गीता का निष्काम कर्म ही जीवन सरिता में घोलो तुम 

आज हमारी गीता पर जो प्रतिबन्ध की तुने सोचा है 
शायद तुमने अपने विनाश को कुरुक्षेत्र में खींचा है 

शायद तुमको याद नहीं क्या था भारत के वीरों का गौरव 
शेरों के दल में निर्भय खेला था भारत के वीरों का शैशव 

जिस गीता को पढ़ मसीह ने येरुसलम का उपदेश दिया 
जिस गीता को पढ़ मसीह ने निष्काम कर्म वैराग्य लिया 

आज हमारी गीता पर जो प्रतिबन्ध की तुने सोचा है 
शायद तुमने अपने विनाश को कुरुक्षेत्र में खींचा है

उस गीता से पापी तुम आज डरे सहमे क्यों फिरते हो !!
पूछो चर्चों के पादरियों से इतना गीता से क्यों डरते हो ??

जाकर यूनानी से पूछो डरते भारत की तलवारों से क्या ???
उन मतवालों के लिए आज साइबेरिया क्या रसिया क्या ??
हे महापुरुषों मै भारत का युवा शर्मिंदा हू की हमें याद है की आज क्रिसमस है लेकिन हम भूल गए की आज आप महामानवों का जनमदिन है |
महामना मालवीय जी से ……..
हम भूल गए की आज तक क्रिसमस ने हमको कुछ नहीं दिया है फिर भी हम खुशियाँ मना रहे है जैसे “बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना”|धिक्कार है मुझे स्वयं पर की हम भूल गए की आप महामना मालवीय जी ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के लिए,भारतीय संस्कृति के रक्षण और पोषण के लिए पुरे भारत में कितने लोगों से मिले दान लिया और भारतीय संस्कृति के रक्षण के लिए भिक्षा भी मांगी और आज आप का गौरव और सुयश पूरी दुनिया में चमक रहा है |
शर्मा आ रही है इस साठ करोड़ युवाओं के देश में की जिस भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की गरिमा को आप ने अध्यक्ष पद से निखारा था आज उस पद पर इटली की एक ईसाई महिला विराजमान है और मै कुछ नहीं कर पा रहा हू |आप का वह स्वप्न की हर गली में एक हनुमान मंदिर हो और युवा उससे प्रेरणा ले सकें आज लक्षित हिंसा विधेयक का रूप ले चूका है और मै कायर युवा आज भी क्रिसमस मन रहा हू |
कितने महान थे आप महामना ठीक है की आप जीवित नहीं हैं नहीं तो शायद ये दुर्दशा देख आप भी रोते ही |
धन्यमना अटल बिहारी जी से ………..
मै आदि पुरुष निर्भयता का,वरदान लिए आया भू पर.
पय पीकर सब मरते आये,लो अमर हुआ मै विष पीकर.
अधरों की प्यास बुझाई है,मैंने पीकर वो आग प्रखर.
हो जाती दुनिया भास्म्सार,जिसको पल भर में ही छूकर.
भय से व्याकुल फिर दुनिया ने प्रारंभ किया मेरा पूजन.
मै नर,नारायण-नीलकंठ,बन गया न इसमें कुछ संसय.
हिन्दू तन-मन,हिन्दू जीवन,रग रग मेरा हिन्दू परिचय. 
मै अखिल विश्व का गुरु महान,देता विद्या का अमर दान.
मैंने दिखलाया मुक्ति मार्ग,मैंने सिखलाया ब्रह्मज्ञान.
मेरे वेदों की ज्योति प्रखर,मेरे वेदों का ज्ञान अमर.
मानव के मन अंधकार,या हो सामने सत्य सहर.
मेरे स्वर नभ में घहर-घहर,सागर के जल में फहर-फहर.
इस कोने से उस कोने तक कर सकता जगती सौरभ मय
हिन्दू तन-मन,हिन्दू जीवन,रग रग मेरा हिन्दू परिचय. 
हे महान राष्ट्र नायक मै साठ करोड़ भारतीय युवा और मुझमे इतनी भीरुता आ चुकी है की मै आप के इस उपरोक्त पंक्तियों के तेज से झुलस जा रहा हूँ |मै सिर्फ उस बकरियों के झुण्ड का एक सदस्य बन कर रह गया हू जो दीखते तो हज़ारों की संख्या में हैं पर एक भेर्डिया भी उनके अस्तित्व को चुनौती अकेले दे देता है |आप ने कारगिल से जिन दुश्मनों को बाहर खदेड़ दिया था वो दुश्मन अब संसद और हमारे घरों में भी पहोच चुके हैं |जिस भारत को आपने परमाणु संपन्न और स्वावलंबी बनाया था वो भारत हम युवाओं ने फिर से अमेरिका और इटली के हाथों गिरवी रख दिया |जिन सड़कों और मोबाइल की क्रांति का आपने उदय किया था वो देश २जी नाम के महाघोटाले में उलझा हुआ है |
बस बहोत जल्दी ही हम युवा आतंकवादियों की भेड़ बकरियां चराते मिलेंगे और आतंकवादी सॉफ्टवेयर भी |
साठ करोड़ भारतीय युवा ……..

Monday, 12 December 2011

कुमा₹ विश्वास जी उर्फ करतल कवि को एक करारा सवाल,स्वामी रामदेव जी को अपमानित करने पर


कुमा विश्वास जी उर्फ करतल कवि { क्यों कहा आगे पढ़िए } ने स्वामी रामदेव जी पर जो कटाक्ष किये हैं उन्हें सुनकर बहुत कष्ट और दुःख हुआ
 ........स्वामी रामदेव जी ने भारतीय संस्कृति के लिए जो योगदान दिया है उसे पूरी दुनिया ने सलाम किया है | हज़ारों करोड रुपये का जो व्यापार टाटा और अम्बानी  IIM & IIT के लोगों के साथ मिल कर खड़ा करते हैं उसे एक युवा सन्यासी ने देखते देखते खड़ा कर दिया सिर्फ अपनी जिजीविषा और दृढसंकल्प के बल पर क्यों की उनके साथ डिग्री धरी अर्थ पिशाच नही बल्कि अपेक्षाकृत कम ही पढ़े लिखे पर संतोष और इमानदारी से जीने वाले लोग हैं |मैं दिव्य योग में पिछले वर्ष गया था और वहां की व्यवस्था ने मुझे अभिभूत कर दिया था यद्यपि की वहाँ व्यवस्था के नाम पर लोग टाई लगाकर मेजों की शोभा नही बढा रहे थे पर एक अपरिचित का स्वागत बिस्कुट और चाय से हुआ था जो की गरिमा पूर्ण था और यथोचित भी,दीवारों पर सुन्दर आदर्श वाक्य लगे थे जिसमे से एक वाक्य ने मुझे सर्वाधिक प्रभावित किया “संस्था में अधिकार नही कर्तव्य दिए जाते हैं” ........यदि श्री रामदेव जी चाहते तो आज राजनीति के सोफे की शोभा बढा रहे होते परन्तु ऐसा नही है वो एक लाख लोगों के साथ मिलकर संघर्ष करने को मैदान में उतर गए थे........मै अन्ना हजारे का भी सम्मान करता हूँ परन्तु यहाँ कोई तुलना वाली बात नही है अपितु कुमार आपको यह सोचना चाहिए की जो भी रामलीला के मैदान में हुआ था स्वामी रामदेव जी के साथ वो भारत में हिलती और लडखडाती सांस्कृतिक चूलों का परिचायक नहीं है क्या ???  अन्ना जी और रामदेव जी के साथ जो कुछ भी घटित हुआ समान समय और परिवेशों में उस बात से इतना तो समझ आ गया था की क्यों गांधी को यरवदा की जेल (घर) और लोकमान्य बालगंगाधर तिलक और विनायक दामोदर सावरकर को मांडले और अंडमान की काल कोठरियां नसीब होती थीं |
      जिस रामलीला में एक लाख लोगों का चीत्कार गूंजा था उसी में किस तरह दिल्ली नगर निगम ने तुम बारातियों का तहे दिल से स्वागत किया था | ......मै उस सुबह बहुत रोया था की क्या हो रहा है उस देश में जहाँ कभी “ब्रह्मराजर्षि रत्नाढयाम वंदे भारत मातरम” का गान होता था क्या से क्या हो गए हम.........???और कुमार आज आपने संत को प्रेरक नही अपितु उपहास और परिहास को परिभाषित करने की विषय बस्तु मान लिया है अरे रोना तो आप को भी चाहिए था ......देश तो आप का भी है और संस्कृति भी तो आप की ही है | यद्यपि कुमार आप लोग कांग्रेस के एक “सेफ्टी वाल्व” हो और लोगो का उदगार निकलने का एक शांतिपूर्ण तरीका हो |
कुमार जी,स्वामी रामदेव जी की नियत एकदम साफ़ थी और निश्छल छवि के लोगों ने उनका दमन थामा था, जरा खुद से भी एक सवाल करिये की अपनी टी आर पी बढाने को आप लोग किस किस हद तक गिरते जा रहे हो, नक्सालियों का,आतंकियों का,देशद्रोहियों का,भारत विरोधी सभी ताकतों के चौखट माज रहे हैं क्यों ????? अरे जिन कृतघ्नों को भारत और भारत के संविधान में आस्था नहीं है उनसे भारत को भ्रस्टाचार मुक्त बनाने को क्यों तलवे चाट रहें हैं जब की सच्चे हिंदू राष्ट्र भक्तों को मंचों पर लाने में सांप्रदायिक संक्रमण का डर लगता है  .....जीभ घिसेगी और कुछ नही होगा क्योंकि वो तो जानते हैं की भ्रष्टाचारी भारत  ही १०० टुकड़ों में टूट सकता है जिसका उन्हें इंतज़ार है | कुमार हम आपका बहुत सम्मान करते थे परन्तु इतना उपहासपूर्ण वक्तव्य और आचरण कर के आप ने अपनी मर्यादा ही भंग कर दिया है| आप किस युवा शक्ति की बात करते हैं अरे ,स्वामी रामदेव जी के साथ भी युवाशक्ति है परन्तु अंतर सिर्फ इतना ही है की जो युवा आप की कविताओं पर तालियाँ पीट कर, सीटी बजाकर खुश होते हैं वो रात को दारु सिगरेट पीकर आप की कविता सेलफोन पर अपनी गर्ल फ्रेंड्स को सुनाकर, “सार बहुत बढियां गावाला” ऐसा सोचते सोचते अगली दोपहर १२ बजे तक सो जाते हैं परन्तु स्वामी रामदेव जी का युवा सुबह उषाकाल में उठता है और जीवन निर्माण के साथ भारत निर्माण भी सोचता है | किस गफलत में जीतें हैं आप ? अब तो शेर और सियार की बात समझ आ जानी चाहिए आप को !!!!!!! सियारों का शोर शेरों की शांति नही दबा सकता है ये बात कभी भूलना नहीं | कांग्रेस की फेकी हुई बोटियाँ ही खा रहे हैं आप लोग और युवाओं को भी वही सिखा रहें हैं, जिस देश का युवा “स्वयमेव मृगेन्द्रता” को अपना आदर्श मानता था उसके हाथों में मोमबत्तियाँ थमाकर परेड करवा रहे हैं आप और “कपालभाति” कहकर देश की मनीषा का अपमान कर रहे हैं |आप के लिए एक लाइन याद आई मुझे .....
||जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है||
     शायद आप इसी सिंड्रोम से पीड़ित हो चुके हैं | कुमार आप दिव्य फार्मा की दवाइयाँ बेचने की बात करते हैं जरा सोचिये कितनी जिंदगियां और परिवार आज इसकी वजह से अपना घर चलाते हैं और कितनी विदेशी मुद्रा भारत में आकर हमें समृद्ध कर रही है ? आप कितने लोगों को रोजगार प्रदान करते हो ?,कितने हिंदी कवि पैदा किये अपनी लोकप्रियता से ??? शायद गलत प्रश्न पूछ दिया मैंने क्यों की आप से ये पूछना अधिक श्रेयस्कर होगा की कितने मेट्रो शहरों में फ्लैट की बुकिंग करा चुके हैं | अरे धिक्कार है की आपने अपनी कलम बेंच दिया.....कैसे हिंदी कवि हैं आप ??? हिंदी साहित्य के नाम पर मंचों से बस अश्लीलता और प्रेम बेंचते हैं , दूकान तो आपने खोल रखी है हिंदी कविता के नाम पर,कह कह कर तालियाँ बटोरने वाले सस्ते कवि हैं आप जिन्होंने सिर्फ अपनी लोकप्रियता महँगी कर लिया है| आप कवि सम्मेलनों में कविता कम प्रहसन अधिक करते हैं अब ये बताना थोड़ा अच्छा नहीं है की प्रहसन का नायक क्या कहलाता है और बाकि आप तो प्रबुद्ध हैं समझ सकते हैं |सत्तर हज़ार फेसबुक मित्रों को यदि आप अपनी सफलता का सेंसेक्स मानते हों तो आप दिवा स्वप्न में खोये हैं क्यों की कोई भी गन्दा सा शब्द फेसबुक पे सर्च करिये तो आप की सफलता का सेंसेक्स आपको पता चल जाएगा | हिंदी कवि को हिंदी की अस्मिता की यदि इतनी ही पड़ी होती तो अपने फेसबुक प्रोफाइल पर अपना नाम इंग्लिश में ना रखते क्यों की बहुसंख्य लोकसेवी हैं जो माँ भारती के लिए अपनी प्रोफाइल का नाम हिंदी में रखते हैं |कहते हैं की आप शिक्षक हैं परन्तु क्या आप की कक्षा के विद्यार्थियों ने आप को क्लास में भी देखा है ? आप सब कुछ करते हैं घूमते हैं,राजनीति करते हैं, करवा चौथ पर महिलाओं के साथ कवि सम्मेलन भी करते हैं, इंजिनीयरिंग और मेडिकल के छात्रों से शिक्षकों और माँ बहनों के बीच द्विअर्थी संवादों पर सीटियाँ बजवाते हैं परन्तु आप भारतीय संविधान के द्वारा प्रदत्त अपना कर्तव्य निर्वहन यानी एक शिक्षक के उत्तर दायित्व का निर्वहन क्यों नही करते हैं ? जनलोकपाल के मंच पर आप कितना बड़ा भ्रष्टाचारी और कौन कौन है कृपया अब पोल खोल ही दें ??
कह कह कर तालियां,सीटियां बजवाकर हर्षित होने वाले हिंदी के महंगी लोकप्रियता के सस्ते कवि, यदि किसी कवि सम्मलेन में अपनी प्रहसन संस्कृति से बाहर निकलकर वास्तविक कविता का पाठ कर लोगों के आँखों में देशभक्ति के अश्रु लाने में कामयाब होइएगा तो मुझे अपना यू ट्यूब वीडियो जरुर दीजियेगा और अपना चेहरा आईने में जरुर देखिएगा की आज सच्चे हिन्दुस्तानी होने का फर्ज अदा किया है |
.......हम आप को ईसाई पादरी नहीं कह सकते ,आतंकवादी नही कह सकते ,माओवादी नही कह सकते,देशद्रोही भी नहीं कह सकते परन्तु काफी सोच विचार कर आप की तालियाँ बटोरने की कला और उसे सुनकर हर्षित होने की अदा के कारण “करतल कवि” आप पर सुशोभित होगा और महँगी ब्रांड जीवन शैली के आधार पर ब्रांड नाम ......
“ कतल कवि ”  
कुमार विश्वास जी आगे से महानता और लोकप्रियता में फर्क समझने की जरुरत आप को है
आप यदि लोकप्रिय हैं तो स्वनाम धन्य स्वामी रामदेव जी महान हैं |
आप यदि व्यक्ति हैं तो स्वामी रामदेव जी व्यक्तित्व हैं
आप यदि कवि हैं तो स्वामी रामदेव जी कविताओं का शीर्षक हैं
आप यदि मंचों पर बैठते हैं तो स्वामी रामदेव जी मंचों की शान हैं
आप यदि गीत गाते हैं तो स्वामी रामदेव जी गान हैं
आप का शिवेश
एक प्रखर राष्ट्रवादी 

क्या आप इस धन्यमना को जानते हैं ?????


महान हेनरी फोर्ड के महान पौत्र अल्फ्रेड फोर्ड हैं जिन्होंने हिंदू धर्मं की महानता से प्रेरित होकर ईसाई धर्म का परित्याग कर श्री अम्बरीश दास हो गए | आप की पत्नी डा.शर्मीला फोर्ड और बेटियों का नाम है अमृता और अनिशा |
आप एक महादानी भी हैं ……आपने वैदिक संस्कृति केंद्र  मास्को के लिए दस मिलियन डालर दान दिया | होनोलूलू  के कृष्ण मंदिर के  लिए  लाख डालर दिया | हवाई द्वीप ,अमेरिका के भक्तिवेदांत के लिए लाख डालर दान दिया|
           सत्ता शिखरों पर बैठे राष्ट्र विरोधी लोगों,धर्मान्तरण में लिप्त ईसाई मिसनरी के कुत्तों और झूठे सेकुलरिस्टो के बालकनी में पोल डांस करने वाली अरुंधती राय और तीश्ता सीतलवाड  जैसे लोगों को अपने कमोड में सर डुबाकर मर जाना चाहिए …………..

क्या आप इस धन्यमना को जानते हैं ?????

क्या आप इस धन्यमना को जानते हैं ?????
 महान हेनरी फोर्ड के महान पौत्र अल्फ्रेड फोर्ड हैं जिन्होंने हिंदू धर्मं की महानता से प्रेरित होकर ईसाई धर्म का परित्याग कर श्री अम्बरीश दास हो गए | आप की पत्नी डा.शर्मीला फोर्ड और बेटियों का नाम है अमृता और अनिशा |
आप एक महादानी भी हैं ……आपने वैदिक संस्कृति केंद्र मास्को के लिए दस मिलियन डालर दान दिया | होनोलूलू के कृष्ण मंदिर के लिए ६ लाख डालर दिया | हवाई द्वीप ,अमेरिका के भक्तिवेदांत के लिए ५ लाख डालर दान दिया|
सत्ता शिखरों पर बैठे राष्ट्र विरोधी लोगों,धर्मान्तरण में लिप्त ईसाई मिसनरी के कुत्तों और झूठे सेकुलरिस्टो के बालकनी में पोल डांस करने वाली अरुंधती राय और तीश्ता सीतलवाड जैसे लोगों को अपने कमोड में सर डुबाकर मर जाना चाहिए …………..
http://en.wikipedia.org/wiki/Ambarish_Das

Friday, 9 December 2011

कठिन हुआ पेट्रोल डलाना पालो देसी कुत्ता


अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (भड़ास)

कठिन हुआ पेट्रोल डलाना पालो देसी कुत्ता
खतम हुआ ये खेल सोनिया ले आओ सिल बट्टा
भारत के बेटो का फ्यूचर कुत्ते पर पढ़ने जायेंगे
भारत से भीख मंगाकर वो इटली में जश्न मनाएगे
राहुल तू कितने देशों में अपना व्याह रचायेगा
तू खायेगा चिकन कोरमा भारत हड्डी को ललचाएगा
सिब्बल नागिन डांस करेगा कलमाडी बीन बजायेगा
दिग्गी डीजे पर कूदेगा   और  राजा सुर में गायेगा
शिवेश एक राष्ट्रवादी

चटक रहे तेरा जीवन


मेहंदी  महावर हल्दी से
चटक रहे तेरा जीवन
टीका कंगन पायल बिछुआ
सब गाते होंगे गीत नया
सुर्ख जोड़े  में सजी उजले पूनम सी
तुझे दुनिया की ना नजर लगे
सूरज सा चमके वो
मिला जो तुझको मीत नया
सब कुछ बदल गया अब तेरा
घर आँगन गालियाँ और रिश्ते
नई उमंगें नई तरंगे
नया हर्ष हो जीवन में
मेरा क्या है खो जायेंगे हम
तेरे जीवन के सन्नाटों में